Friday, 23 October 2015
Tuesday, 20 October 2015
Monday, 5 October 2015
पेनिस का आकार बढ़ा करने के 6 तरीके
पेनिस के आकार का छोटा होना, शारीरिक सम्बंधों की मधुरता को कम कर देता
है और पुरूषों को इससे आत्मग्लानि भी होती है। वे कई बार हाथों से ही
पेनिस का साइज बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज करते हैं। स्ट्रांग इरेक्शन के
लिए आप हेल्दी डाइट ले सकते हैं लेकिन इस समस्या से निजात मिलना, आपकी
मेहनत और एक्सरसाइज करने के सही तरीके पर ही निर्भर करता है।
शीघ्रपतन के इलाज के लिए प्राकृतिक तरीके
इस आर्टिकल में आपको 6 ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बताया जा रहा है जो आपके पेनिस के आकार को बढ़ा देगा और आपकी सेक्स लाइफ हेल्दी हो जाएगी। ये 6 एक्सरसाइज निम्न प्रकार हैं:
पेनिस का आकार बढ़ा करने के 6 तरीके
1. अपने जेस्चर्स से करें: अपने हाथ से ओके साइन बनाएं और उसे पर पेनिस को रखें। इससे पेनिस को सही तरीके से सपोर्ट मिलेगा और उसका आकार स्वत: बढ़ेगा। इसे कम से कम 7 मिनट तक करना चाहिए।
2. अंगूठे से एक्सरसाइज: अपने अंगूठे को पेनिस के निचले हिस्से में रखें और बाकी की उंगलियों को ऊपर से नीचे लाएं। ऐसा 10 सेकेंड तक करें, इससे पेनिस टाइट हो जाएगा। ऐसा आप बेडरूम में जाने से पहले कर लें।
3. स्ट्राॅकिंग तरीका: पेनिस के लिए स्ट्रॉकिंग तरीका काफी कारगर होता है। इससे बॉडी में ब्लड़ सर्कुलेशन के साथ-साथ पेनिस में भी अच्छी तरह ब्लड़ सर्कुलेट होता है।
4. गर्म तौलिया: गर्म तौलिया लें और इसमें पेनिस को लपेट लें। इससे पेनिस को गर्माहट मिलेगी और उसका साइज बढ़ेगा।
5. इरेक्शन में: इरेक्शन के दौरान पेनिस का साइज काफी मायने रखता है। इसके लिए आप इसे साइड से स्ट्रेच करें। ऐसा लगतार 10 सेकेंड तक करते रहें।
6. परफेक्ट स्ट्रेच: अपने पेनिस को पकड़ें और इसे इसे हल्के से नीचे ले जाएं। 10 से 15 मिनट तक ऐसा कई बार करें। यह सबसे अच्छी पेनिस एक्सरसाइज होती है।
नोटः अगर सेक्स से संबंधित आपकी भी कोई समस्या या सवाल है तो उसे आप हमें हिंदी या अंग्रेजी में मेल कर सकते हैं। ईमेलः info@hashmi.com
शीघ्रपतन के इलाज के लिए प्राकृतिक तरीके
इस आर्टिकल में आपको 6 ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बताया जा रहा है जो आपके पेनिस के आकार को बढ़ा देगा और आपकी सेक्स लाइफ हेल्दी हो जाएगी। ये 6 एक्सरसाइज निम्न प्रकार हैं:
पेनिस का आकार बढ़ा करने के 6 तरीके
1. अपने जेस्चर्स से करें: अपने हाथ से ओके साइन बनाएं और उसे पर पेनिस को रखें। इससे पेनिस को सही तरीके से सपोर्ट मिलेगा और उसका आकार स्वत: बढ़ेगा। इसे कम से कम 7 मिनट तक करना चाहिए।
2. अंगूठे से एक्सरसाइज: अपने अंगूठे को पेनिस के निचले हिस्से में रखें और बाकी की उंगलियों को ऊपर से नीचे लाएं। ऐसा 10 सेकेंड तक करें, इससे पेनिस टाइट हो जाएगा। ऐसा आप बेडरूम में जाने से पहले कर लें।
3. स्ट्राॅकिंग तरीका: पेनिस के लिए स्ट्रॉकिंग तरीका काफी कारगर होता है। इससे बॉडी में ब्लड़ सर्कुलेशन के साथ-साथ पेनिस में भी अच्छी तरह ब्लड़ सर्कुलेट होता है।
4. गर्म तौलिया: गर्म तौलिया लें और इसमें पेनिस को लपेट लें। इससे पेनिस को गर्माहट मिलेगी और उसका साइज बढ़ेगा।
5. इरेक्शन में: इरेक्शन के दौरान पेनिस का साइज काफी मायने रखता है। इसके लिए आप इसे साइड से स्ट्रेच करें। ऐसा लगतार 10 सेकेंड तक करते रहें।
6. परफेक्ट स्ट्रेच: अपने पेनिस को पकड़ें और इसे इसे हल्के से नीचे ले जाएं। 10 से 15 मिनट तक ऐसा कई बार करें। यह सबसे अच्छी पेनिस एक्सरसाइज होती है।
नोटः अगर सेक्स से संबंधित आपकी भी कोई समस्या या सवाल है तो उसे आप हमें हिंदी या अंग्रेजी में मेल कर सकते हैं। ईमेलः info@hashmi.com
Sunday, 4 October 2015
किडनी में स्टोन है तो बरतें ये 5 सावधानियां
किडनी में स्टोन का दर्द यकीनन असहनीय है लेकिन दवाओं से इसे यूरीन के
रास्ते निकाला जा सकता है। ऐसे में डाइट में कुछ सावधानियां बरतने से किडनी
के स्टोन से छुटकारा पाना आसान हो सकता है।
अधिक से अधिक पानी पीएं
किडनी में स्टोन के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अधिक से अधिक पानी पीते रहें जिससे किडनी में जमा स्टोन या टॉक्सिक यूरीन के प्रवाह के साथ निकल जाएं। प्रतिदिन चार लीटर पानी का सेवन किडनी से स्टोन हटाने में मदद करता है।
नींबू या एप्पल साइडर वेनेगर
डाइट में नींबू व एप्पल साइडर वेनेगर की मात्रा बढ़ाएं। इससे शरीर के टॉक्सिक तत्वों को निकालने में आसानी होती है।
कैल्शियम की अधिकता वाली डाइट
डाइट में ऐसी चीजों की मात्रा बढ़ाएं जिनमें कैल्शियम की अधिकता हो। क्लीनिकल जर्नल ऑफ अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के शोध की मानें तो कैल्शियम ओक्सलेट की अधिकता वाली डाइट किडनी में जमा स्टोन को तोड़ने और बाहर निकालने में मदद करती है। दूध, मक्खन, नट्स आदि का सेवन फायदेमंद है।
सोडा के सेवन से बचें
किडनी में स्टोन के मरीजों के लिए सोडा ड्रिंक से संबंधित कई भ्रांतियां हैं। लेकिन असलियत यह है कि सोडा में मौजूद फोस्फोरिक एसिड की अधिकता किडनी में स्टोन को बढ़ाती है।
लो ओक्सालेट डाइट लें
ओक्सालेट की कमी वाली डाइट किडनी के मरीजों के लिए फायदेमंद है। काली चाय, अनाज, नट्स आदि का सेवन किडनी का स्टोन हटाने में फायदेमंद है।
नोटः अगर सेक्स से संबंधित आपकी भी कोई समस्या या सवाल है तो उसे आप हमें हिंदी या अंग्रेजी में मेल कर सकते हैं। ईमेलः info@hashmi.com
अधिक से अधिक पानी पीएं
किडनी में स्टोन के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अधिक से अधिक पानी पीते रहें जिससे किडनी में जमा स्टोन या टॉक्सिक यूरीन के प्रवाह के साथ निकल जाएं। प्रतिदिन चार लीटर पानी का सेवन किडनी से स्टोन हटाने में मदद करता है।
नींबू या एप्पल साइडर वेनेगर
डाइट में नींबू व एप्पल साइडर वेनेगर की मात्रा बढ़ाएं। इससे शरीर के टॉक्सिक तत्वों को निकालने में आसानी होती है।
कैल्शियम की अधिकता वाली डाइट
डाइट में ऐसी चीजों की मात्रा बढ़ाएं जिनमें कैल्शियम की अधिकता हो। क्लीनिकल जर्नल ऑफ अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के शोध की मानें तो कैल्शियम ओक्सलेट की अधिकता वाली डाइट किडनी में जमा स्टोन को तोड़ने और बाहर निकालने में मदद करती है। दूध, मक्खन, नट्स आदि का सेवन फायदेमंद है।
सोडा के सेवन से बचें
किडनी में स्टोन के मरीजों के लिए सोडा ड्रिंक से संबंधित कई भ्रांतियां हैं। लेकिन असलियत यह है कि सोडा में मौजूद फोस्फोरिक एसिड की अधिकता किडनी में स्टोन को बढ़ाती है।
लो ओक्सालेट डाइट लें
ओक्सालेट की कमी वाली डाइट किडनी के मरीजों के लिए फायदेमंद है। काली चाय, अनाज, नट्स आदि का सेवन किडनी का स्टोन हटाने में फायदेमंद है।
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Saturday, 3 October 2015
अर्थराइटिस से बचाव के लिए अपनायें ये उपाय
- अर्थराइटिस के बचाव के लिए सही रखें आहार।
- व्यायाम होता है अर्थराइटिस से बचाने में मददगार।
- धूम्रपान बढ़ाता है अर्थराइटिस का खतरा।
- मोटापा भी अर्थराइटिस की बड़ी वजह।
अर्थराइटिस आपकी रोजमर्रा की जिंदगी
पर बहुत बुरा असर डालता है। छोटे से छोटा काम करने में भी आपको काफी
दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन, कुछ उपाय अपनाकर आप अर्थराइटिस
को दूर रख सकते हैं। अर्थराइटिस एक ऐसा रोग है जो उम्र बढ़ने के साथ काफी
परेशान करता है। कई लोगों को ऑस्टियोअर्थराइटिस, य्हेयूमेटॉइट अर्थराइटिस
अथवा जन्मजात अर्थराइटिस परेशान कर सकता है। सबसे सामान्य अर्थराइटिस
ऑस्टियोअर्थराइटिस होता है, जिसमें उपास्थि का अध:पतन हो जाता है। इससे
अस्थियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे दर्द होता है। आइए हम आपको
बताते हैं कि किन उपायों को अपनाकर आप अर्थराइटिस से बच सकते हैं।
खूब पानी पियें
आपके जोड़ों में मौजूद उपास्थि शॉक एब्जावर की तरह काम करतीं हैं। ऑस्टियोअर्थराइटिस के कारण उपास्थियों का ह्रास होता है। क्योंकि यह पदार्थ 70 फीसदी पानी से बना होता है, आप रोजाना कम से कम दो लीटर पानी पीकर इसे तंदुरुस्त रख सकते हैं। कॉफी, चाय और सोडा में पानी होता है, लेकिन ये मूत्रवर्धक की तरह काम करते हैं, जिससे आपके शरीर से पानी जल्द ही निकल जाता है। इस प्रकार ये आपके शरीर को सही प्रकार से हाइड्रेट भी नहीं कर पाते। तो याद रखिए ये पेय पदार्थ पानी का विकल्प नहीं हैं।कैल्शियम की मात्रा बढ़ाएं
अपने आहार में पनीर, दूध और दही जैसे डेयरी उत्पादों को शामिल करें। अगर आपको डेयरी उत्पादों से एलर्जी है, तो अपने आहार को अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों जैसे, ब्रोकली, सालमन, पालक, राजमा, मूंगफली, बादाम, टोफू और तिल के बीजों को शामिल करें।विटामिन है जरूरी
विटामिन सी और डी स्वस्थ जोड़ों के लिए बहुत जरूरी होते हैं। विटामिन डी य्हेयूमेटॉइड अर्थराइटिस को शुरू होने से रोक सकते हैं। इसके लिए आपको चाहिए कि सूर्य की रोशनी में अधिक बितायें। सूर्य का प्रकाश विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। विटामिन डी कैल्शियम को शरीर और हड्डियों द्वारा अवशोषित करने में भी मदद करता है। इसके साथ ही आप सालमन और टूना जैसी मछलियां, संतरे का जूस, दूध, दही, अंडे आदि का सेवन भी कर सकते हैं। डेयरी उत्पाद के किसी भी सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले हकीम से जरूर संपर्क करें, इन पदार्थों का ओवरडोज आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।वजन रखें काबू में
ऑस्टियोअर्थराइटिस में आपको अपने जोड़ों जैसे, घुटनों, टखनों और कूल्हों आदि पर अधिक जोर नहीं डालना चाहिए। और जब आपका वजन काबू में होगा, तो आपके जोड़ों पर अधिक जोर नहीं पड़ेगा। सौभाग्य की बात यह है कि वजन कम करने से अर्थराइटिस का खतरा कम होता है। कई शोध यह बात साबित करते हैं कि मोटापा उपास्थियों के पुनर्निर्माण में भी बाधा उत्पन्न करता है। अगर क्षतिग्रस्त उपास्थि जल्द ही नयी उपास्थि से न बदला जाए, तो जल्द ही ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है।नियमित व्यायाम करें
नियमित तौर पर कार्डियोवस्कुलर और लाइट वेटलिफ्टिंग एक्सरसाइज करें। न केवल व्यायाम आपका वजन काबू में रख सकता है, बल्कि इससे आपकी मांसपेशियां लचीली और शक्तिशाली होती हैं। अगर आप निष्क्रिय जीवनशैली जीते हैं तो आपको उम्र बढ़ने के साथ-साथ अर्थराइटिस होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। आपको सप्ताह में तीन से पांच बार 20 से 30 मिनट का व्यायाम जरूर करना चाहिए। इससे आप अर्थराइटिस के खतरे को कम कर सकते हैं। अपने व्यायाम को सावधानी से चुनें। अधिक जोर वाले व्यायाम आपके जोड़ों पर अधिक दबाव डालते हैं। आपको हल्के व्यायाम जैसे, तैराकी, साइक्लिंग और जॉगिंग आदि से काफी लाभ पहुंचेगा।योग और सामान्य स्ट्रेचिंग
इस प्रकार के व्यायाम आपके जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इससे आपकी मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। मांसपेशियां आपके जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव का कुछ हिस्सा स्वयं पर झेल जाती हैं। स्ट्रेचिंग उम्र बढ़ने के साथ आपके जोड़ों में लचीलापन बनाए रखने में मदद करती है।चोटों का खयाल रखें
अगर आपको एक ही स्थान पर बार-बार चोट लगती है, तो आपको खयाल रखने की जरूरत है। टखने की मांसपेशियों में परेशानी भविष्य में अर्थराइटिस की समस्या को जन्म दे सकती है। इस बात का ध्यान रखें कि अगर आपके जोड़ों में चोट लगी हो, तो उसे ठीक होने का उचित समय दें। और उस चोट से उबरने के लिए आप किसी फिजिकल थेरेपिस्ट की मदद भी ले सकते हैं।धूम्रपान छोड़ें
धूम्रपान आपकी हड्डियों और सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। धूम्रपान छोड़ने के बाद अर्थराइटिस के मरीजों के जोड़ों और मांसपेशियों में सुधार देखा जाता है। इसके साथ ही उनके दर्द में भी कमी आती है।
क्रियाशील रहें
काम हो या खेल स्वयं को शारीरिक रूप से अधिक क्रियाशील रखें। लेकिन, एक ही शारीरिक क्रिया को बार-बार न दोहरायें। इससे आपकी मांसपेशियों पर बेकार का दबाव पड़ता है। अपने रोजमर्रा के बैठने-उठने के तरीके को भी सही रखें। लंबे समय तक न बैठे रहें। इससे आपकी कमर की मांसपेशियों पर जोर पड़ता है। हर तीस मिनट की डेस्क जॉब के बाद खड़े हो जाएं।शराब का सेवन कम करें
अधिक शराब आपके शरीर के लिए अच्छी नहीं। शराब का अधिक सेवन आपकी हड्डियों को काफी नुकसान पहुंचाता है। आपको ऐसा करने से बचना चाहिए।इन सावधानियों को अपनाकर आप स्वयं को अर्थराइटिस की तकलीफ से काफी हद तक बचा सकते हैं।
नोटः अगर सेक्स से संबंधित आपकी भी कोई समस्या या सवाल है तो उसे आप हमें हिंदी या अंग्रेजी में मेल कर सकते हैं। ईमेलः info@hashmi.com
सिरदर्द के प्रकार और इनसे बचने के उपाय
- सिरदर्द की समस्या एक आम शिकायत है।
- सिरदर्द सिर्फ एक नहीं कई प्रकार के होते है।
- माइग्रेन व तनाव के कारण भी हो जाता है।
- तेज सिरदर्द होने पर डाक्टर की सलाह लें।
बदलती
जीवनशैली और गलत खानपान में किसी को भी सिरदर्द होना एक आम बात है।
सिरदर्द से तात्पर्य है सिर के एक या एक से अधिक हिस्सों में साथ ही गर्दन
के पिछले भाग में हल्के से लेकर तेज़ दर्द का एहसास होना। सिर दर्द के कई
कारण होते हैं, हालांकि ज़्यादातर सिरदर्द किसी गंभीर बीमारी की वजह से
नहीं होते। वे कभी कभी होते हैं और दवा लेने या जीवनशैली में थोड़ा बदलाव
करने से ठीक हो जाते हैं। आमतौर पर सिरदर्द नींद पूरी न होने, दांतों में
दर्द होने, थकान होने, गलत दवाई लेने, चश्मे का नंबर बढ़ने, मौसम बदलने पर
हो सकता है। सिर दर्द एक प्रकार का नही होता, इसके अनेक प्रकार हैं। आइए हम
आप को बताते है सिर दर्द के प्रकारों के बारें में-
कई बार सिरदर्द की वजह आपका खानपान भी हो सकता है जिसपर आप कभी गौर नहीं करते। लेकिन अगर आप अपने रुटीन और डाइट पर थोड़ा गौर करें तो आप सिर्फ उनपर नियंत्रण से ही अक्सर होने वाले सिरदर्द से छुटकारा पा सकते हैं।
नोटः अगर सेक्स से संबंधित आपकी भी कोई समस्या या सवाल है तो उसे आप हमें हिंदी या अंग्रेजी में मेल कर सकते हैं। ईमेलः info@hashmi.com
तनाव से सिर दर्द
तनाव से होने वाला सिरदर्द सामान्य प्रकार का होता है। ये मांसपेशियों में सिकुड़न के कारण होता है। ये सिरदर्द लंबे समय तक तनाव के रहने के कारण होता है। तनाव से पैदा हुआ सिरदर्द अक्सर धीमा और स्थिर होता है। 90 प्रतिशत सिरदर्द इसी कारण होते हैं और आमतौर पर खुद ही ठीक हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त रोजाना होने वाला सिरदर्द भावनात्मक तनाव, थकान व शोरगुल से भी हो सकता है। वैसे तो ऐसा दर्द सिर में कहीं भी हो सकता है, परन्तु गर्दन या दोनों कनपटियों में यह दर्द तेज होता है।माइग्रेन से सिरदर्द
माइग्रेन ऐसा सिरदर्द है जो अधिकतर आनुवंशिक होता है। यह सिरदर्द हर किसी में अलग-अलग होता है। माइग्रेन सिर के आधे हिस्से में और बहुत तेज होने वाला सिरदर्द है। इस सिरदर्द में कई बार जी मिचलाना, उल्टी होना, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता, दृष्टि-दोष, सुस्ती, बुखार और ठंड भी लगती है। माइग्रेन से कई बार धीरे-धीरे और कई बार तेज होने लगता है। इसका कारण किसी भोज्य पदार्थ से एलर्जी भी हो सकता है।साइनस सिरदर्द
साइनस सिरदर्द तब होता है जब आपके साइनस में संक्रमण हो जाता है और उसमें जलन होने लगती है। साइनस में सिरदर्द तेज और कई बार लगातार होता रहता है। यह अधिकतर सुबह शुरू होता है। साइनस के कारण सिरदर्द में आंखों में, गाल में और सिर के अगले हिस्से में दबाव और दर्द होता और साथ ही इसमें नीचे झुकने पर दर्द बहुत तेज होता है। इसमें ऊपरी दांत में दर्द, बुखार, ठंड लगना, चेहरे पर सूजन आदि की समस्या भी आ जाती है।ऐसें बरतें सावधानियां
अगर आप को इन दर्दो से निजात पाना है तो तनाव कम करें, नींद पूरी लेने का प्रयास करें, लेकिन फिर भी सिरदर्द की समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर के पास जानें में बिल्कुल भी देर न करें क्योंकि आपकी थोड़ी-सी लापरवाही से समस्या बढ सकती है। 50 प्रतिशत लोग डॉक्टर के पास जाने की बजाय खुद ही अपने सिरदर्द का इलाज करने लगते है लेकिन सिरदर्द के लिए उचित इलाज की जरूरत है।कई बार सिरदर्द की वजह आपका खानपान भी हो सकता है जिसपर आप कभी गौर नहीं करते। लेकिन अगर आप अपने रुटीन और डाइट पर थोड़ा गौर करें तो आप सिर्फ उनपर नियंत्रण से ही अक्सर होने वाले सिरदर्द से छुटकारा पा सकते हैं।
नोटः अगर सेक्स से संबंधित आपकी भी कोई समस्या या सवाल है तो उसे आप हमें हिंदी या अंग्रेजी में मेल कर सकते हैं। ईमेलः info@hashmi.com
Friday, 2 October 2015
कैसे करें डायबिटीज कंट्रोल ?
डायबिटीज जिसे मधुमेह भी कहा जाता है एक गंभीर बीमारी है जिसे धीमी मौत (साइलेंट किलर ) भी कहा जाता हैl
संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में l इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है तथा रक्त की कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग नहीं कर पाती l यदि यह ग्लूकोज का बढ़ा हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है l
डायबिटीज के कारण (Causes of Diabetes )-
खान पान एवं लाइफ स्टाइल की गलत आदतें जैसे मधुर एवं भारी भोजन का अधिक सेवन करना,चाय, दूध आदि में चीनी का ज्यादा सेवन,कोल्ड ड्रिंक्स एवं अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स अधिक पीना,शारीरिक परिश्रम ना करना,मोटापा,तनाव,धूम्रपान,तम्बाकू,आनुवंशिकता आदि डायबिटीज के प्रमुख कारण हैं l
डायबिटीज के लक्षण (Diabetes Symptoms)-
बार बार पेशाब लगना,प्यास ज्यादा लगना, भूख ज्यादा लगना,बिना काम करे भी थकान होना,शरीर में कहीं घाव होने पर जल्दी ठीक ना होना तथा त्वचा का बार बार इन्फेक्शन होना l ये सब डायबिटीज के लक्षण हैंl
यदि इनमे से कुछ लक्षण यदि लगातार दिखाई दें तो खून में शुगर की जाँच अवश्य करवानी चाहिए यह जाँच बहुत सामान्य और सस्ती होती है जो छोटी छोटी लैब्स में आसानी से हो जाती हैं इसके लिए शुगर का शक होने पर दिन में किसी भी समय (ब्लड शुगर- रैंडम) जाँच करवाई जा सकती है या बार -बार जरुरत पड़े तो जाँच करने की मशीन घर पर लायी जा सकती है जो ज्यादा महँगी नहीं होती l
डायबिटीज रोग के उपद्रव (Complications of Diabetes) –
यदि मधुमेह रोग का समय पर पता ना चले या पता चलने पर भी खान पान तथा जीवन शैली में लगातार लापरवाही की जाये और समुचित चिकित्सा ना की जाये तो खून में सामान्य से अधिक बढ़ा हुआ शुगर का लेवल शरीर के अनेक अंगों जैसे गुर्दे (Kidney),ह्रदय (Heart),धमनियां (Arteries) आँखें (Eyes) त्वचा (Skin) तथा नाड़ी तंत्र (Nervous System) को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है और जब तक रोगी संभलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है l
डायबिटीज की चिकित्सा-
1. ख़ान पान में सुधार करें-चीनी (sugar) एवं अन्य मीठे पदार्थो का सेवन कम से कम करें या ना करें,चोकर युक्त आटा,हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, मीठे फलों को छोड़ कर अन्य फल खाएं,एक बार में ज्यादा खाने की बजाय भोजन को छोटे छोटे अंतराल में लें,घी तेल से बनी एवं तली भुनी चीजें जैसे- समोसे, कचौड़ी ,पूड़ी ,परांठे आदि का सेवन कम से कम करें,गेहूँ,जौ एवं चने को मिला कर बनाई हुई यानि मिस्सी रोटी शुगर की बीमारी में बहुत फायदेमंद होती है l
3. तनाव (Tension,Anxiety Stress) से बचें –
मधुमेह रोग में तनाव की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है तनाव से बचने की पूरी कोशिश करें l स्ट्रेस या तनाव के कारणों को आपसी बात चीत से हल करें, योगा, प्राणायाम,ध्यान तथा सुबह शाम घूमने से स्ट्रेस कंट्रोल करने में सहायता मिलती है l
4. घरेलु उपाय ( Home Remedies for Diabetes)–
आयुर्वेद की कुछ जड़ी बूटियां मधुमेह रोग में बहुत उपयोगी हैं इनका सेवन डायबिटीज में बहुत लम्बे समय से किया जा रहा है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में इनकी उपयोगिता सिद्ध कर चुका है l
उपरोक्त उपाय जरुरत के अनुसार उपयोग करने चाहियें ,खून में शुगर का लेवल कम ना हो जाये इसलिए समय समय पर शुगर चैक करते रहना चाहिए l
संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है विशेष रूप से भारत में l इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है तथा रक्त की कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग नहीं कर पाती l यदि यह ग्लूकोज का बढ़ा हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है l
डायबिटीज के कारण (Causes of Diabetes )-
खान पान एवं लाइफ स्टाइल की गलत आदतें जैसे मधुर एवं भारी भोजन का अधिक सेवन करना,चाय, दूध आदि में चीनी का ज्यादा सेवन,कोल्ड ड्रिंक्स एवं अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स अधिक पीना,शारीरिक परिश्रम ना करना,मोटापा,तनाव,धूम्रपान,तम्बाकू,आनुवंशिकता आदि डायबिटीज के प्रमुख कारण हैं l
डायबिटीज के लक्षण (Diabetes Symptoms)-
बार बार पेशाब लगना,प्यास ज्यादा लगना, भूख ज्यादा लगना,बिना काम करे भी थकान होना,शरीर में कहीं घाव होने पर जल्दी ठीक ना होना तथा त्वचा का बार बार इन्फेक्शन होना l ये सब डायबिटीज के लक्षण हैंl
यदि इनमे से कुछ लक्षण यदि लगातार दिखाई दें तो खून में शुगर की जाँच अवश्य करवानी चाहिए यह जाँच बहुत सामान्य और सस्ती होती है जो छोटी छोटी लैब्स में आसानी से हो जाती हैं इसके लिए शुगर का शक होने पर दिन में किसी भी समय (ब्लड शुगर- रैंडम) जाँच करवाई जा सकती है या बार -बार जरुरत पड़े तो जाँच करने की मशीन घर पर लायी जा सकती है जो ज्यादा महँगी नहीं होती l
डायबिटीज रोग के उपद्रव (Complications of Diabetes) –
यदि मधुमेह रोग का समय पर पता ना चले या पता चलने पर भी खान पान तथा जीवन शैली में लगातार लापरवाही की जाये और समुचित चिकित्सा ना की जाये तो खून में सामान्य से अधिक बढ़ा हुआ शुगर का लेवल शरीर के अनेक अंगों जैसे गुर्दे (Kidney),ह्रदय (Heart),धमनियां (Arteries) आँखें (Eyes) त्वचा (Skin) तथा नाड़ी तंत्र (Nervous System) को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देता है और जब तक रोगी संभलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है l
डायबिटीज की चिकित्सा-
1. ख़ान पान में सुधार करें-चीनी (sugar) एवं अन्य मीठे पदार्थो का सेवन कम से कम करें या ना करें,चोकर युक्त आटा,हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, मीठे फलों को छोड़ कर अन्य फल खाएं,एक बार में ज्यादा खाने की बजाय भोजन को छोटे छोटे अंतराल में लें,घी तेल से बनी एवं तली भुनी चीजें जैसे- समोसे, कचौड़ी ,पूड़ी ,परांठे आदि का सेवन कम से कम करें,गेहूँ,जौ एवं चने को मिला कर बनाई हुई यानि मिस्सी रोटी शुगर की बीमारी में बहुत फायदेमंद होती है l
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहे –
3. तनाव (Tension,Anxiety Stress) से बचें –
मधुमेह रोग में तनाव की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है तनाव से बचने की पूरी कोशिश करें l स्ट्रेस या तनाव के कारणों को आपसी बात चीत से हल करें, योगा, प्राणायाम,ध्यान तथा सुबह शाम घूमने से स्ट्रेस कंट्रोल करने में सहायता मिलती है l
4. घरेलु उपाय ( Home Remedies for Diabetes)–
आयुर्वेद की कुछ जड़ी बूटियां मधुमेह रोग में बहुत उपयोगी हैं इनका सेवन डायबिटीज में बहुत लम्बे समय से किया जा रहा है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में इनकी उपयोगिता सिद्ध कर चुका है l
- दाना मेथी –
- करेला –
- जामुन –
- विजयसार –
- मधुमेह नाशक पाउडर –
उपरोक्त उपाय जरुरत के अनुसार उपयोग करने चाहियें ,खून में शुगर का लेवल कम ना हो जाये इसलिए समय समय पर शुगर चैक करते रहना चाहिए l
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